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मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी मेरे जन्मों के साथी सजन लिरिक्स

मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी मेरे जन्मों के साथी सजन लिरिक्स

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मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।



पग नूपुर की झंकारो से,

भावो भरे मधुर इशारों से,
साँसों के पंखो से उड़कर,
तारों तक खोज लगाउंगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।



योगन का भेष बनाकर के,

इस जग से आँख बचाकर के,
मन के इकतारे पे साजन,
मैं गीत विरह के गाऊँगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।



तुम छुपना राधा के मन में,

मधुवन की रंगीली कुंजन में,
मैं बन कर ललिता की वीणा,
थिर्को पर तुम्हे नचाउंगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।



मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,

मेरे जन्मों के साथी सजन,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

स्वर – विनोद अग्रवाल जी।
प्रेषक – अमित माहेश्वरी।
9330753621


https://youtu.be/m-busSIQ5vY

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