ए महिमा संता री,
दोहा – संत बिना संसार में,
कोनी सांचो ज्ञान,
अंधियारे मिट जावे जद,
संत बतावे ध्यान।
राजस्थान री रेत में,
भक्ति रा फूल खिलाय,
धरती धन्य बनावता,
संता चरण पड़ाय।
ए महिमा संता री,
इण धरती ऊपर,
संत जनमिया रे,
महिमा संतो री।।
ओ नागौर री धरती मायने,
वीर तेजा जनमिया,
गऊ माता रै कारणे,
तो प्राण गंवायो रे,
ए महिमा संतो री।।
ओ रूणिचा री धरती मायने,
रामदेव जी प्रकटीया,
छत्तीस कौम रै दुख हरवा,
अवतार धर्यो रे,
ए महिमा संतो री।।
ओ मेड़ता री धरती मायने,
मीरा बाई जनमिया,
कृष्ण गोपाल री भक्ति में यो,
जीवन बितायो रे,
ए महिमा संतो री।।
ओ मुकाम री धरती मायने,
जाम्भोजी जनमिया,
जीव दया अर पेड़ बचावा,
पाठ पढ़ायो रे,
ए महिमा संतो री।।
ओ धन्या भगत किसान बनकर,
हरि सूं प्रेम लगायो रे,
साची भक्ति रा कारणे,
भगवान आंगन आयो रे,
ए महिमा संतो री।।
ओ संतां री पावन वाणी सूं,
जग रो अंधेरो मिटायो रे,
केशव चौबीसा गुरुजी रे शरणें,
भवजल पार लगावो रे,
ए महिमा संतो री।।
महादेव सत्संग मंडल पटोलिया।
रचना – केशव चौबीसा।
Ph. – 9929931512








