किया सूता ओ,
ठाकुर जी खूंटी ताण,
भगता में बको जोरको पड़े।।
रूज़क रोटी धंधों पाणी,
थारे बिन ना चले,
थारी कृपा बिना सावरा,
पत्ता भी ना हिले,
मारी गाड़ी के लगा दे धक्कों आन,
भगता में बको जोरको पड़े।।
टूट गई सारी उम्मीदा,
रूठ गयो संसार,
थारे नाम की आस में बैठो,
थारो दास लाचार,
थाकी सेवा ने समझूं में मारी शान,
भगता में बको जोरको पड़े।।
थे तो दीन दुखिया रा साथी,
माने क्यों तरसाओ,
ज्यों आया नरसी मेहता के,
एकर मारे आवो,
मारे जीवन की मेटों थे खींचाताण,
भगता में बको जोरको पड़े।।
मैं तो थारो सगो सावरा,
फेर परख काँ लेवो,
हरदम याद करु मैं थाने,
थे हिरदा माई रेवो,
थारी चौखट पे आयो मैं थाने जाण,
भगता में बको जोरको पड़े।।
घणा बजाया तान तम्बूरा,
थारा कीर्तन गाया,
लिख लिख हार गया है शानू,
पार नहीं कोई पाया,
थारा नाम से बणी है मारी जाण,
भगता में बको जोरको पड़े।।
किया सूता ओ,
ठाकुर जी खूंटी ताण,
भगता में बको जोरको पड़े।।
गायक – मनीष सुथार।
लेखक – शानू रैगर सांवता।
मो. 9610489087








