जीवन मौत का खेल है पगले क्या रोना क्या धोना भजन लिरिक्स

जीवन मौत का खेल है पगले,
क्या रोना क्या धोना,
जितनी चाबी भरी राम ने,
उतना चले खिलौना,
रोते रोते हंसना सीखो,
हंसते हंसते रोना।।



ऋषि मुनि और ज्ञानी ध्यानी,

पीर और पैगम्बर
खाली हाथ यहाँ से लौटे,
दारा और सिकंदर,
साथ किसी के नही गया है,
साथ किसी के नही गया है,
ये चांदी ओर सोना,
जितनी चाबी भरी राम ने,
उतना चले खिलौना,
रोते रोते हंसना सीखो,
हंसते हंसते रोना।।



जिस दिन टूटेगी ये तेरी,

सांसो की जंजीरे,
काम नही आएगी तेरी,
धरी रहे जागीरे,
मौत के चला न जग में,
मौत के चला न जग में,
किसी का जादू टोना
जितनी चाबी भरी राम ने,
उतना चले खिलौना,
रोते रोते हंसना सीखो,
हंसते हंसते रोना।।



कोठी बंगले महल मकान,

और तेरी ये धन दौलत,
पल दो पल की तेरी इज्जत,
पल दो पल की शोहरत,
आज जो पाया तूने जग में,
आज जो पाया तूने जग में,
कल पड़ेगा खोना
जितनी चाबी भरी राम ने,
उतना चले खिलौना,
रोते रोते हंसना सीखो,
हंसते हंसते रोना।।



जीवन मौत का खेल है पगले,

क्या रोना क्या धोना,
जितनी चाबी भरी राम ने,
उतना चले खिलौना,
रोते रोते हंसना सीखो,
हंसते हंसते रोना।।

स्वर – दिनेश जी भट्ट।
प्रेषक – कपिल टेलर
9509597293


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