जय हो जम्भ गुरू तपधारी गुरू विष्णु रा अवतारी

ओ हो ओ हो,
जय हो जम्भ गुरू तपधारी,
गुरू विष्णु रा अवतारी,
लोहट घर अवतारी,
थारी महिमा है बडी भारी,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
कलजुग रा हो अवतारी,
थे हो विष्णु रा अवतारी,
आया पीपासर नगरी माई,
थेतो लीला रचाई भारी,
जय हो गुरू थारी जय हो,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई।।

तर्ज – जग घूमिया।



प्रहलाद ने गुरू वचन दिराया,

उन वचना रे कारण,
कलयुग मे आया,
थारे वचना ने गुरू,
थारे वचना ने गुरू,
जाणे संसार है,
दियोडा वचन गुरूजी,
दीयो थे निभाय,
ओ लोहट घर आया थे ही,
गुरू वचन निभायो थे ही,
मन खुशीयां है बडी भारी,
खुशी होया ये तो नर नारी,
जय हो गुरू थारी जय हो,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई।।



बालपना मे गुरू लीला रचाई,

मगन रया गुरू गाया चराई,
बोले नाही मुखडे सु,
बोले नाही मुखडे सु,
माता दुख पायो है,
लोहट ने जाय जद,
पंडित बुलायो है,
दिवला पानी रा जलाया थे ही,
पहलो शब्द सुनायो थे ही,
परचा ग्वाला ने दीनो थे ही,
आम आकार लगायो थे ही,
जय हो गुरू थारी जय हो,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई।।



भगवा वेश धर समराथल आया,

विष्णु पंथ गुरू आप चलाया,
पंडित सुभाष गुरू,
पंडित सुभाष गुरू,
जश थारो गायो है,
थारी महिमा रो गुरू,
पार नही पायो है,
गुरू भगती करा मै थारी,
रेवु चरना मे सदा थारी,
साकी भजन सुनावा थारी,
लीला जग सु है न्यारी थारी,
जय हो गुरू थारी जय हो,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई।।



जय हो जम्भ गुरू तपधारी,

गुरू विष्णु रा अवतारी,
लोहट घर अवतारी,
थारी महिमा है बडी भारी,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
कलजुग रा हो अवतारी,
थे हो विष्णु रा अवतारी,
आया पीपासर नगरी माई,
थेतो लीला रचाई भारी,
जय हो गुरू थारी जय हो,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई,
जग घूमिया थारे जैसा न कोई।।

गायक – मोईनुद्दीनजी सुभाष पंडित।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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