हमने तुमको बहुत पुकारा,
अब तो बाबा आना है,
लाड़ को तेरे बेटे तरसे,
सर पे हाथ फिराना है।।
तर्ज – क्या लगता हूं बाबा तेरा।
एक छोटी सी अर्जी मेरी,
तेरा घर बनवाऊं मैं,
खाटू जैसा शीश सलोना,
मंदिर में ले आऊं मैं,
अब न तड़पाओ मनमोहन,
रिश्ता बहुत पुराना है,
हमनें तुमकों बहुत पुकारा,
अब तो बाबा आना है।।
जब तू आ जाए मेरे मोहन,
फूलों से श्रृंगार करूं,
खीर चूरमा भोग लगाऊं,
तेरा नित गुणगान करूं,
तेरी बगिया में महकू मै,
ऐसा पुष्प बनाना है,
हमनें तुमकों बहुत पुकारा,
अब तो बाबा आना है।।
पर्चों की है चर्चा भारी,
आकर झोली भर दो न,
आस लगाए बैठा ‘रितु’,
आस ये पूरी कर दो न,
हार के जो भी दर पे आए,
उसको तुम्हे जिताना है,
हमनें तुमकों बहुत पुकारा,
अब तो बाबा आना है।।
हमने तुमको बहुत पुकारा,
अब तो बाबा आना है,
लाड़ को तेरे बेटे तरसे,
सर पे हाथ फिराना है।।
स्वर – सोनाली नागेश्वर।
लेखन – प्रियांश अग्रवाल “रितु”
श्री श्याम मित्र मंडल बालाघाट।
9713885250








