पतित पावनी मुक्ति दायनी है ये दिव्य कथा
पतित पावनी मुक्ति दायनी, है ये दिव्य कथा, सच्चे दिल से जो भी सुनता, मन की मिटे व्यथा, ये है...
Read moreDetailsपतित पावनी मुक्ति दायनी, है ये दिव्य कथा, सच्चे दिल से जो भी सुनता, मन की मिटे व्यथा, ये है...
Read moreDetailsसब दिन होत ना एक समान, दोहा - समय समय की बात है, समय समय का खेल, कभी समय बिछड़ावत...
Read moreDetailsहरि की अंत समय याद आई, कोई ना मेरा, मैं ना किसी का, सबसे ठोकर खाई, हरी की अंत समय...
Read moreDetailsकष्ट मिटावण जगत रचावण, आप लियो अवतार, विश्वकर्मा स्वामी विनती बारम्बार, विश्वकर्मा स्वामी विनती बारंबार।। सकल बम्हाण्ड की रचना किनि,...
Read moreDetailsक्यों अपनों पे तू इतराए, जाएगा कोई संग ना, अब मान भी ले मनवा, मान भी ले, मान भी लो...
Read moreDetailsएक दिन जाणो रे माया का लोभी, यहां नहीं रेणो रे, एक दिन जाणों रे।। बेटा बहु तो कदी नी...
Read moreDetailsसती नारी का सत बलवान, दोहा - पति परमेश्वर एक है, सुनो सखी चीत लाय, ताकि सेवा कीजिए, और ना...
Read moreDetailsक्या तुम्हें पता है ऐ अर्जुन, ये द्वापर जाने वाला है, अन्याय और पापों से भरा, अब कलयुग आने वाला...
Read moreDetailsजीवन में जो चाहो सुख पाना, हरि नाम कभी ना बिसराना, दिव्य ज्योति मन में जलाना, हरि नाम कभी ना...
Read moreDetailsआया दीप उत्सव ये सुहाना, ज्योति प्रेम की मिलके जगाना, के दिन बड़ा पावन है, घर घर पर दीप जलाओ,...
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