कालिका माता जी की लावणी लिखित में
कालिका माता जी की लावणी दुर्गा दुख भंजन, दुर्ग चित्तौड़ पर, करे राज कालका।। चित्तौड़ दुर्ग पर बैठी कालका, चारों...
Read moreDetailsकालिका माता जी की लावणी दुर्गा दुख भंजन, दुर्ग चित्तौड़ पर, करे राज कालका।। चित्तौड़ दुर्ग पर बैठी कालका, चारों...
Read moreDetailsजग में गुरु बड़ा उपकारी, दे उपदेश बन्धन काटे, दुविधा मेटे सारी।। लख चौरासी का फंद छुड़ावै, भव सागर से...
Read moreDetailsसोना लागो मारा सांवरा, रूडा रूपाला।। अरे चांद सो मुखड़ा, चमक सूरज की, मस्तक पर केसरियो जामो, अरे सोणा लागो...
Read moreDetailsनाथ थारे काई को घाटो रे, सांवरिया काई को घाटो, दर्शन से मारा पाप कटे तो, थे क्यों नहीं काटो,...
Read moreDetailsहे मंगल की मूल भवानी, शरणा तेरा है, शरणा तेरा है, शरणा तेरा है, आसरा तेरा है, माँ मंगल की...
Read moreDetailsउन घर जाजे बैरन नींद, दोहा - कहे संत सगराम, अब भजन किस विध होय, गले पड़ी जण सुरडया, म्हारे...
Read moreDetailsडाली बाई ऋषियों री लड़की, नूगरा नहीं पिछाणी रे, वा नूगरा रो मूडो कालो, नरका रा हितकारी रे।। भृगु रिसी...
Read moreDetailsसंत ने हंस गत एक है, करे निज मोतीयो रो आहार, अवल वचन री आखड़ी, ऐसा ऐसा है स्वभाव, एड़े...
Read moreDetailsभिलोणो भाव रो हो ओ, दोहा - राम झरोखे बैठ के, सब का मुजरा लेय, जैसी नर की चाकरी, वैसा...
Read moreDetailsसोहंग शिखर में जाय, मिले निज मेवा, जीवित मोक्ष मिल जाय, करम ने तजणा है ओ जी।। अके कवल के...
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