अलख निरंजन निज निराकारी विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी
अलख निरंजन निज निराकारी, विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।। निर्गुण से सिर्गुण हो आया, ज्योति स्वरूप है आपकी माया। अलख...
Read moreDetailsअलख निरंजन निज निराकारी, विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।। निर्गुण से सिर्गुण हो आया, ज्योति स्वरूप है आपकी माया। अलख...
Read moreDetailsकेवे भाटी हरजी सुणो गुरुदेवा, जनम जनम बाबा करूँ चरणा की सेवा।। न कोई बात पीर जी आपके छाने, थोड़ी...
Read moreDetailsसिमरू माता शारदा, गणपत लागू पाए, सुण्डाले ने सिमरू, गणपत लागू पाय है, हरी खेऊ गुगल धूप हरी ने।। आगणौ...
Read moreDetailsम्हारा रोकड़िया हनुमान, दोहा - हनुमत तेरी धाक से, धूजे लंका कोट, करेली मजूरी राम की, तूने पायो लाल लंगोट।...
Read moreDetailsजल में तो डूबी नाव, नावडीयो काई रे करे। दोहा - कबीर सब जग निरधना, तो धनवंता ना कोई, धनवंता...
Read moreDetailsकानुड़ा का दिल, लुट ले गई गुजरी, कानुडा का दिल, लुट ले गई गुजरी, ले गई गुजरी आ ले गई...
Read moreDetailsओतो आगे रे कानुडो लाल, ऊबो मारी माँ, इन रे सरवरिये पानी, कदे हि ना जावु, इन रे सरवरिये पानी,...
Read moreDetailsआंख्या देखो भाईड़ा, दोहा - तपस्या बरस हजार री, सत्संगत पल एक, तो भी बराबर नहीं तुले, सुखदेव कियो विवेक।...
Read moreDetailsराम ने भजलो रे भाई, छंद - संगत कीजे सन्त की, क्या नुगरां से काम, नुगरां ले जावे नारगी, सन्त...
Read moreDetailsदोय दिना री बन्दा सायबी, दोहा - नहीं हैं तेरा कोय, नहीं तू कोयका, अरे हां बाज़िन्द स्वार्थ रा संसार,...
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