ओ बाईसा अब तो हमको बाबोसा के दर्श करा दो ना

ओ बाईसा अब तो हमको,
बाबोसा के दर्श करा दो ना,
दर्श के प्यासे नैन बावरे,
प्यास बुझा दो ना,
दर्श करा दो ना,
ओ बाईसा अब तो हमकों,
बाबोसा के दर्श करा दो ना।।

तर्ज – ओ कान्हा अब तो।



बाबोसा के दर्श बिना अब,

मिलता नही कही चेन,
प्रीत में पागल बनकर में तो,
रस्ता निहारु दिन रेन,
कैसे मिलेंगे बाबोसा हमको,
रस्ता दिखा दो ना,
दर्श करा दो ना,
ओ बाईसा अब तो हमकों,
बाबोसा के दर्श करा दो ना।।



बाबोसा से रिस्ता मेरा,

गहरा सागर से,
मिलेंगे बाबोसा मुझको,
मन उम्मीदों पे,
रह न सकू में दूर एकपल भी,
दूरी मिटा दो ना,
दर्श करा दो ना,
ओ बाईसा अब तो हमकों,
बाबोसा के दर्श करा दो ना।।



बाईसा गर आप बुलाओ,

दौड़ वो आयेंगे,
दिलबर बाईसा की कृपा से,
दर्श को पायेंगे,
बाबोसा से अर्जी बाईसा,
आप लगा दो ना,
दर्श करा दो ना,
ओ बाईसा अब तो हमकों,
बाबोसा के दर्श करा दो ना।।



ओ बाईसा अब तो हमको,

बाबोसा के दर्श करा दो ना,
दर्श के प्यासे नैन बावरे,
प्यास बुझा दो ना,
दर्श करा दो ना,
ओ बाईसा अब तो हमकों,
बाबोसा के दर्श करा दो ना।।

गयिका – दिव्यांशी बाम्बीवाल।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन, म.प्र. 9907023365


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