पांच नाग पकड़ कर लाया प्रकट खेल रचाया लिरिक्स
पांच नाग पकड़ कर लाया, प्रकट खेल रचाया, हेली जोगी जग में आया।। सत री संगत महापुरुष की लाया, खीलन...
Shekhar Mourya is the founder and editor of Bhajan Diary, a trusted platform dedicated to Hindi devotional literature. With years of experience in publishing and organizing bhajans, aartis, chalisas, mantras, and kirtans, he is committed to preserving authentic devotional content in a simple, accurate, and easy-to-read format for devotees around the world.
पांच नाग पकड़ कर लाया, प्रकट खेल रचाया, हेली जोगी जग में आया।। सत री संगत महापुरुष की लाया, खीलन...
तू सब जानता है, तुझे क्या बताएं, मैं जग से छुपा लूँ, मेरा हाल दिल ये, मगर तुमसे बाबा, छिपे...
मेरे घर के देवता मेरे भगवान है, मेरे भगवान है, वही मेरी जिंदगी है वही मेरे प्राण है, मेरे घर...
सवाली हूँ सवाली को ना धन चाहिए, ना धन चाहिए, गजानंद तुम्हारी शरण चाहिए, शरण चाहिए।। तर्ज - दीवाने है...
जबसे शरण तेरी आई हूँ बाबा, क्या बतलाऊँ क्या पा गई बाबा, मौज में कटने लगी ज़िन्दगी, जबसे कृपा की...
लाल ध्वजा लहराये रे, मैया तोरी ऊंची पहड़िया।। लोंग इलायची के बीड़ा लगाए, चम्पा चमेली के हार बनाये, लाल अनार...
भूल आई म्हारा कान्हा, जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी, ओढ़नी जी ओढ़नी जी, ओढ़नी जी कान्हा ओढ़नी, भूल्याई मारा कान्हा, जमुना...
प्रणाम गुरुदेव जी ने बारम्बार, दोहा - गुरु को कीजिए बंदगी, कोटि कोटि प्रणाम, किट न जाने भृंग को, गुरुजी...
पैर धो लेने दो भगवन, दोहा - दीनानाथ अनाथ का, भला मिला संयोग, अगर तारों के नहीं प्रभुजी, तो हंसी...
सैया सतगुरूजी ने देख्या जी, आज रो भलाई दिन उगियो, गुरू माने दर्शन दीना जी।। आज सैया आंबों मोरियो, सतगुरु...
© 2016-2026 Bhajan Diary