काम कठिन भक्ति का,
दोहा – भक्ति भक्ति सब कहें,
नहीं भक्ति के वंश,
हिरण्यकश्यप घर प्रहलाद जन्म लियो,
उग्रसेन घर कंस।
अरे भक्ति दिलबर देश री,
और लायें रामानंद दास,
कबीरजी प्रकट करी,
सात लोक नौ खंड।
दया करी मेरे सतगुरु दाता,
अरे गेला बताया मुक्ति का,
साधू भाई,
काम कठिन भक्ति का,
नहावे धोवे शोभा बढावे,
लाम्बा काड़े टीका,
दया धरम दिल में नहीं राखे,
रटे नही नाम हरि का,
साधु भाई,
काम कठीन भक्ति का।।
धरम करता ने आवे धूूजणी,
पाप कमाबा ने तीखा,
सेवा न साजे पूंगल ज्यूं गाजे,
धुपे नहीं पाप उसी का,
साधु भाई,
काम कठीन भक्ति का।।
अन्न रा दान ऐड़ा मत जाणो,
करलो दान मुठ्ठी का,
दया धर्म ने भुल मत जाजो,
जोगाराम जुगती का,
साधु भाई,
काम कठीन भक्ति का।।
सुता जीव ने गुरु चेतन कीदा,
आलस उड़ाया म्हारा तन का,
गुर्जर गरीबी में ‘कनीराम जी’ बोले,
होग्या राज उसी का,
साधु भाई,
काम कठीन भक्ति का।।
दया करी मेरे सतगुरु दाता,
अरे गेला बताया मुक्ति का,
साधू भाई,
काम कठिन भक्ति का,
नहावे धोवे शोभा बढावे,
लाम्बा काड़े टीका,
दया धरम दिल में नहीं राखे,
रटे नही नाम हरि का,
साधु भाई,
काम कठीन भक्ति का।।
गायक – धनराज जी जोशी।
प्रेषक – लोकेश गाडरी खेमाणा।
मो. 7850970321








