जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलयुग रा बाबा अवतारी,
बाबा धोरा री धरती में मोटो धाम,
दर्शन ने आवे नर नारी,
हेलो सुनता ही आवे रामापीर,
चढ लीले घोड़े असवारी।।
ओ चंदो चमकीयो,
भादवा री बीज,
अजमल घर प्रगटीया अवतारी,
ओ बाबा भगतो रा हो भगवान,
धणी निकलंक नेजाधारी,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
ओ बाबा लीले,
घोडे रा असवार,
हाथा मे भालो भलके भारी,
धोली ध्वजा रे फरुके असमान,
धणी ने ध्यावे दुनिया सारी,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
ओ धणीया पीरो रा,
पीर केवाय,
बाबा ध्वजाबंध धारी,
जो अरजी लावे रूनीचा दरबार,
अरजी थे सुनो भगता री,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
ओ बाबा जगमग,
जागे थारी ज्योत,
दर्शन री दाता बलिहारी,
बाबा दीन दुखियों रा दातार,
पीड़ा थे हरो भगता री,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
ओ घणी घणी खम्मा,
रूनीचा रा श्याम,
परचा जग में हद भारी,
ओ थारी महीमा रो,
पायो कोनी पार,
लीला सबसु है न्यारी,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
ओ धणीया *मनीष सीरवी*,
चरना रे माय,
लिखे ओ बाबा महीमा थोरी,
ओ गावे सहदेव भाकल चरना रे माय,
लगावे बाबा हाजरी थारी,
ओ गावे *सोनू कंवर* चरना रे माय,
लगावे बाबा रे हाजरी,
ओ बाबा बेडा करदो थे म्हारा पार,
थे लाज राखो भगता री,
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलजुग रा बाबा अवतारी।।
जय हो जय हो म्हारा,
रुनीचा रा नाथ,
कलयुग रा बाबा अवतारी,
बाबा धोरा री धरती में मोटो धाम,
दर्शन ने आवे नर नारी,
हेलो सुनता ही आवे रामापीर,
चढ लीले घोड़े असवारी।।
गायक – सहदेव जी भाकल व सोनू जी कंवर।
लेखक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला ब्यावर राजस्थान)








