ऐसी कर दो कृपा,
मुझ पे हे लाडली,
नाम तेरा सदा ही,
पुकारा करूं।।
तर्ज – बंसी वाले के चरणों में सर।
वास हृदय में हर पल,
तुम्हारा ही हो,
मेरी आंखों में तेरा,
नजारा ही हो,
चाह जीवन में,
इतनी सी है स्वामिनी,
तेरी सेवा में राहें,
बुहारा करूं,
ऐसी कर दों कृपा,
मुझ पे हे लाडली,
नाम तेरा सदा ही,
पुकारा करूं।।
तेरी चौखट पे सर ये,
झुका हो सदा,
तेरी रहमत का साया,
हो मुझ पे सदा,
माना तेरी दया के,
मैं लायक नहीं,
किरपा हो जाए,
जग से किनारा करूं,
ऐसी कर दों कृपा,
मुझ पे हे लाडली,
नाम तेरा सदा ही,
पुकारा करूं।।
मैं भी सुनकर के,
महिमा को आया तेरी,
पार अधमों को,
करती है करुणामई,
बिगड़ी बन जाएगी,
प्रीत अब तो यहीं,
फिर तो दुनिया को,
सारी बताया करूं,
ऐसी कर दो कृपा,
मुझ पे हे लाडली,
नाम तेरा सदा ही,
पुकारा करूं।।
करुणामयी किरपामयी,
मेरी दयामयी राधे।।
स्वर – महावीर जी शर्मा।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
99266 52202








