परली पार तार दे नैया,
दूर किनारा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
दुश्मन बेरी हुआ जमाना,
डरता डरता डोलु,
हर तरिया लाचार भगत,
मैं झूठ कदीना बोलूं,
खर्चा घना आमदन थोड़ी,
नहीं गुजरा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
सारे मार्ग बंद हुए कोई,
और नजर ना आवे,
हाल हुआ बेहाल भगत,
रो रो के बरथा सुनावे,
बाग लिया मुरझा मेरा,
गया पिचकारा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
जग में नाम सुना तेरा,
तू बिगड़ी बात बनाता है,
खाली हाथ मांगने वाला,
हाथ ना खाली जाता है,
भर देता भंडार भगत का,
खूब पिटारा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
बिसरख में मुनि राम गुरुजी,
तेरे धाम पर आया मैं,
गांव बली में कवि बिजन का,
नमन गुरु के पाया मैं,
करण लगा गोपाल भगत भी,
भजन तुम्हारा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
परली पार तार दे नैया,
दूर किनारा बाबा जी,
जिसका नहीं सहारा उसका,
तू ही सहारा बाबा जी।।
Singer – Mahendra Sharma Ji
Upload By – Mohit Tomar
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