सुनो गवैया रे,
ना चाहिए रुपया रे,
हरि के ध्यान का,
अपने ज्ञान का,
रंग बरसाएंगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
जब छिड़ जाती लहधारी,
लगे से हर मैं सूरती महारी,
संग गा के देख ना उठे टेक,
सूर पंचम लावेंगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
ना जिकरा खोटी करी का,
संत रटते हैं हरदम नाम हरि का,
ना फूहड़ गंद मिले अच्छे छंद,
सही अर्थ बतावेगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
मत संतों को आजमाना,
तू ही रटते है,
हम सांग करण भी जाना,
करके खोज मिले मन की मौज,
सही विधि बतावेगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
न्यू Rk शर्मा गावे,
अपना गांव गोरिया खेड़ी बतावे,
दे देना साथ करु जय जय नाथ,
किस्मत चमकाएंगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
सुनो गवैया रे,
ना चाहिए रुपया रे,
हरि के ध्यान का,
अपने ज्ञान का,
रंग बरसाएंगे,
असली सौदा पावेगा,
जब बाबे गावेंगे।।
गायक – सुमित कलानौर।
लेखक – रामकेश शर्मा गोरा खेड़ी।
प्रेषक – रवि राणा।
9466056237








