आधी आधी रात,
पोहर को झांझरको,
लाग्यो बैरी रो डाव रे,
उठो म्हारा भाईड़ो,
करो थे च्यानणो,
देखो बैरी रो घाव रे।।
बाबो सा ने मुजरा दिज्यो मोकला,
भाईड़ा ने दिज्यो जुहार रे,
बहन सिगांर सिर हाथ फेरज्यो,
माता रोवे झारम-झार रे।।
घाव ना दिखे घोबो ना दिखे,
कर गयो मायली मार रे,
कोटड़िया में मुजरा देवो मोकला,
साथीड़ा ने घणोड़ा जुहार रे।।
मामोसा री मिलणेरी मन माही रेगी,
मामीसा रो रेग्यो प्यार रे,
मै तो जाण्यो हंसो घणा दिन घुमसी,
पल मे होग्यो त्यार रे।।
सपने में सिद्ध राजा सन्मुख उभया,
केवे माता जी से बात रे,
काली नाडी में कलंक म्हाने लाग्यो,
विषधर लड़ियो रात रे।।
ठुकरायण उठ परो ठाकर ने जगायो,
सुणी भभूता री बात रे,
बाहरली भींत पर लाल सांखियो,
आ म्हारे सिध्दां री सैनाण रे।।
सुरग लोअ स्यूं आई रे पालकी,
सिद्ध कियो सुरगा में वास रे,
खेमदास कामड़ जस गावे,
बाबा मै थारे चरणा रो दास रे।।
आधी आधी रात,
पोहर को झांझरको,
लाग्यो बैरी रो डाव रे,
उठो म्हारा भाईड़ो,
करो थे च्यानणो,
देखो बैरी रो घाव रे।।
गायक – सम्पत उपाध्याय।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








