मस्ती मिले जो खाटू में,
कहीं और मिले ना,
सावन का महीना है ये,
सावन का महीना।।
किरपा बरस रही है,
चारो ओर खाटू में,
सब मिलके देखो झूम रहे,
आज खाटू में,
मद मस्त हो गया,
मुझे अब होश कोई ना,
सावन का महीना है ये,
सावन का महीना।।
सब भूल के मैं आज तेरे,
धाम आ गया,
खाटू तेरा ये बाबा मुझे,
खूब भा गया,
दरबार से मिला जो कहीं,
और मिले ना,
सावन का महीना है ये,
सावन का महीना।।
अम्बर में देखो आज,
घटा घोर घनेरी,
भजनों से मगर गूंज रही,
तेरी ये नगरी,
नज़रे मिली “सरल” कहीं,
अब ओर मिले ना,
सावन का महीना है ये,
सावन का महीना।।
मस्ती मिले जो खाटू में,
कहीं और मिले ना,
सावन का महीना है ये,
सावन का महीना।।
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🎤 गायक / Singer – Shivam Paras
✍️ लेखक / Lyrics – Pankaj Aggarwal Ji ‘Saral’
☎️ संपर्क / Contact – 8506049718








