भगत उमाया कंवर जी,
होया किकरिये तैयार रे।
दोहा – बेलू बांहांग विडरावणी,
आप घोड़े असवार,
धनासर धोरां बीच में,
कंवर देव दातार।
भगत उमाया कंवर जी,
होया किकरिये तैयार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
छमा छम छड़िया बाजै,
ढोल घुरावे जी,
डेरुं पर बे तान तोड़े,
जस थारो गावे जी,
नागण का थे कंवर लाडला,
हो रही जय जयकार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
पैदल पथ पाणी नही पिवे,
अन दियो त्याग जी,
दर्शन दयो दयानिधि दाता,
खुलज्य म्हारा भाग जी,
बाई फुलां रा बिरा,
थास्यूं म्हाने प्यार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
जगमग ज्योत जगे निसवासर,
चुरमो चढावे जी,
धजा नारियल मिश्री मेवा,
भोग लगावे जी,
गुदळी खीर बाशक रा जाया,
थाल्यां दिनी ठार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
रोगी दोखी कोढी कंलंकी,
बांझ नार मनावे जी,
पवन लाल बलबुध्दि निर्धन,
मन ईच्छा फल पावे जी,
बलवन्त कहे कंवर जी म्हाने,
थारो ही आधार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
भगत उमाया कँवर जी,
होया किकरिये तैयार रे,
सांवणियों सुरंगो लागे,
ठंडी पड़ फुवांर रे।।
गायक – समुन्द्र चेलासरी।
प्रेषक – मनीष कुमार लौट।
मो – 8107115329








