देवों के देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए,
मरघट में डेरा डाला,
भूतों संग रहने वाला,
भूतेश्वर डमरू वाला,
बिगड़ी बनाए,
देवो का देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए।।
तर्ज – जा रे जा ओ हरजाई।
पावन गंगा के तट पर,
बैठा ये औघड़दानी,
तीनों लोकों का है स्वामी,
संग विराजे जगत की जननी,
दुर्गा मात भवानी,
सारे जग की है महारानी,
संग में है गणपति,
भैरव बजरंगबली,
दर्शन करके मनोरथ,
पूरे हो जाए,
देवो का देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए।bd।
राजा हो या रंक सभी ही,
इसके द्वार पे आए,
गंगा जल भोले पे चढ़ाए,
धूप कपूर से आरती करते,
महिमा गाए और मस्तक पे,
काला टिका लगाए,
जो भी मांगे मिले,
सारी विपदा टले,
देखो खोल खजाना भोले,
सबको लुटाए,
देवो का देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए।।
सोना चांदी के आभूषण,
इसको नहीं सुहाए,
ये तो तन पे भस्म रमाए,
भांग धतूरा खा कर भोले,
मस्ती में रम जाए और फिर,
डम डम डमरू बजाए,
देव ऐसा कहीं,
और देखा नहीं,
सबकी नैया ये ‘सोनू’,
पार लगाए,
देवो का देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए।bd।
देवों के देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए,
मरघट में डेरा डाला,
भूतों संग रहने वाला,
भूतेश्वर डमरू वाला,
बिगड़ी बनाए,
देवो का देव कहाए,
दोनों हाथों से लुटाए,
दानी ना कोई ऐसा,
सारी दुनिया बतलाए।।
Singer – Vijay Soni








