मत रोवे री गुजर की,
दुख काई को,
आग्यो रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
उठ सवेरे कुंवर बाडो देख्या,
रात चोर गाया न लेग्या,
कुण लासी रे गाया न,
एसो कुण छ बांको,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
वचन देऊ गुजर की थाने,
मैं लाऊ थाकी गाया न,
भालो भलके रे,
नागौरी सूरा को,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
लिलण चढने तेजल चाल्यो,
अग्नि जलतो नाग बचायो,
रीस खावे रे तेजाजी प,
नाग काला को,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
वचन देय तेजो आगे चाल्यो,
लाछा की गाया ले आयो,
राड लडयो रे रूखालो,
तेजो गाया को,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
सतवादी तेजो बाम्बी आयो,
वचन पे सूरो प्राण लुटायो,
जग मे होग्यो रे तेजाजी,
अमर नाम थाको,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
धन धन रे जाटा का जाया,
भक्ता पे राखे छतर छाया,
धरजो रमेश प्रजापत,
माथे हाथ थाको,
आग्यों रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
मत रोवे री गुजर की,
दुख काई को,
आग्यो रे तेजाजी,
कुंवर जाटा को।।
गायक – रमेश प्रजापत (टोंक)








