कीर्तन में सांवरे के,
किरपा बरस रही है,
महसूस हो रहा है,
बाबा यहीं कहीं है।।
देखो गज़ब सजा है,
दरबार साँवरे का,
एक बार आके कर लो,
दीदार साँवरे का,
जन्नत की तू क्या सोचे,
जन्नत तो वो यहीं है,
कीर्तन में साँवरे के,
किरपा बरस रही है।bd।
जमघट है प्रेमियों की,
दिलकश है ये नज़ारा,
सेठों का सेठ देखो,
लगता है कितना प्यारा,
दातार मेरे श्याम सा,
देखा भी क्या कहीं है,
कीर्तन में साँवरे के,
किरपा बरस रही है।।
बनते है काम सबके,
होती यहाँ सुनवाई,
जो भाव से पुकारे,
रुकते नहीं कन्हाई,
‘शिवम’ को जो मिले यहाँ,
मिलता कहीं नहीं है,
कीर्तन में साँवरे के,
किरपा बरस रही है।bd।
कीर्तन में सांवरे के,
किरपा बरस रही है,
महसूस हो रहा है,
बाबा यहीं कहीं है।।
Singer – Namrata Karwa
Writer – Shivam Pansari








