माँ गंगा के पावन तट पर जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया,
तट पे गया तट पे गया,
तट पे गया मेरी मां,
मां गंगा के पावन तट पे जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया।।
तर्ज – दिल दीवाना ना जाने।
शिवशंकर के शीश पे,
उद्गम गौमुख धाम है,
भागीरथ के कर्म से,
सफल हुआ ये काम है,
राजा सगर सुत साठ हजार,
तूने किया उनका उद्धार,
उद्धार किया उन्हें तार दिया,
भव पार किया मेरी मां,
मां गंगा के पावन तट पे जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया।।
पतितोद्धारिणी भगवती,
शंकर मौलीविहारिणी,
देवी सुरेश्वरी भगवती,
गंगेत्रिभुवन तारिणी,
जल महिमा भव रोग हरे,
पाप कटे सब ताप हरे,
भयहारिणी भवतारिणी,
सुखदायिनी मेरी मां,
मां गंगा के पावन तट पे जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया।।
माँ गंगा के पावन तट पर जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया,
तट पे गया तट पे गया,
तट पे गया मेरी मां,
मां गंगा के पावन तट पे जो गया,
उसका जीवन जग में निर्मल हो गया।।
गायक – विद्याकान्त झा।
9931244994
रचनाकार – श्री सूर्यकांत झा।








