मेरे सर पे अपना तू हाथ धर,
इतनी दया मेरे नाथ कर,
हे श्याम मोहन मुरलीधर,
घनश्याम मोहन मुरलीधर।।
तर्ज – किसी राह में किसी मोड़ पर।
( राग – चारुकेशी )
मेरा नसीब तेरे हाथ है,
तू ही सदा मेरे साथ है,
कर दे मेरा उद्धार तू,
नाराज है किस बात पर,
मेरे श्याम मोहन मुरलीधर,
घनश्याम मोहन मुरलीधर।।
मैं तो सारी दुनियां से हारकर,
आया तुम्हारे द्वार पर,
अब तू बता जाऊं कहां,
ये दर तुम्हारा छोड़कर,
मेरे श्याम मोहन मुरलीधर,
घनश्याम मोहन मुरलीधर।।
मैं भटक रहा हूं राह में,
मंजिल की अपनी चाह में,
सब पर दया करते हो तुम,
“नरसिंह” पे भी हो इक नजर,
मेरे श्याम मोहन मुरलीधर,
घनश्याम मोहन मुरलीधर।।
मेरे सर पे अपना तू हाथ धर,
इतनी दया मेरे नाथ कर,
हे श्याम मोहन मुरलीधर,
घनश्याम मोहन मुरलीधर।।
स्वर – मन्नु मृदुल।
संपर्क – 7570831445
लेखन – नरसिंह राही जी।








