रण में रजपूतों ने मत छेड़,
हिलमिल परजा ओ हालिया,
आया रावला माये रे,
गोपीचंद राजा,
वारी ओ बाईसा रा वीरा,
वारी ओ दिवालियों रा दिवा,
वारी ओ होलियो रा गेरिया,
वारी ओ फ़ुलडो रा भारा,
वारी ओ लापी रा लूदा,
वारी ओ राखड़ियो रा फुदा,
वारी ओ मिसरी री डलियो रे,
सिंग रे मारो नी,
वंका पहाड़ रो रे जी।।
अरे सिंगड़ो आयो सेर में,
अरे घणो करे वगार रे,
गोपीचंद राजा,
सिंग रे मारे ने दातन डोल जो रे।।
केतो राजा सिंग मारजो,
नितो तो नीचो भाल रे,
गोपीचंद राजा,
सिंग रे मारे ने वेगा आवजो रे।।
अरे झारी मेली हाथ सू,
लीदी हाथ तलवार रे,
गोपीचंद राजा,
सिंग रे मारेने दातन डोलसू रे।।
अरे भालो हाथ में,
हुआ घोड़े असवार रे,
गोपीचंद राजा,
जाए ने भाकर रे घेरो गालियो रे।।
अरे सिंगडो सुतो नींद में,
सिंगड़ी डोले वाव रे,
गोपीचंद राजा,
अरे सुतो रे सिंग ने हेलो मारियो रे।।
अरे थे घड़ो रा राजवी,
और में वन र सरदार रे,
गोपीचंद राजा,
अमो आयो रे मारगिये पाचो जा पारो रे।।
अरे काग उड़ावे कोमनी,
ऊबी जोव वाट रे,
गोपीचंद राजा,
अमो आयो रे अवसरिये पाचो जा पारो रे।।
अरे सूली यू उपर सियो भमे,
ज्यू तीतर ऊपर बाज रे,
जंगल री रोनी,
रन में राजपूतो मती सेलजे रे।।
अरे क्यू थे सुता नींद में,
अरे कीकर आवे निंद रे,
जंगल रा राजा,
माते रे गोपीचंद घेरो गालियो रे।।
अरे उठ सिंग रे कियो धड़ापो,
अरे छूटी हाथ तलवार रे,
गोपीचंद राजा,
पेले रे धड़ाके सिंगडो मारियो रे।।
अरे सिंगरो मरियो पड़ियो धरण पर,
सिंगड़ी नाटी जाए रे,
गोपीचंद राजा,
जग माये कोई नही है ओपनो रे।।
गायक – लक्ष्मण तंवर।
प्रेषक – हरीश सुथार।
9323031224








