दादा ने मानो रे भाई,
भगता ने मानो रे भाई,
कर विश्वास दादा ने मानों,
मन इच्छा फल पाई।।
खिराज भगत जी ने,
पीर जी मिल गया,
आकर भगती जलाई,
हाथ बीच में दे दी कामड़ी,
बाकी काया कंचन बनाई।।
दूजी पीढ़ी में बिंजा भगत जी,
मेडी को ध्यान लगाया,
जा मेडी में ताला तोड़िया,
फिर सजन किवाड़ खुलवाया।।
तीजी पीढ़ी में आदू भगत जी,
ऐसी सूरत लगाई,
खिराज दादा जी का जोड़ दिया दुपिया,
फिर जग में जोर सोवाई।।
चौथी पीढ़ी में रूपा भगत जी,
गरीबन की करिया सुनाई,
गिरधारी खाॅ की माँ ने आँखें दीजद,
नगर में खुशी मनाई।।
पांचवीं पीढ़ी में मनफूल भगत जी,
खिराज भगत का अवतारी,
चारों कूटं में चेला तरफ दिया,
जाने गोरखनाथ तपधारी।।
छठी पीढ़ी में भगत इमीचंद जी,
सीतल भगती धारी,
सन बयासी का हुक्म होया जद,
धुरमेडि ने जावे।।
जा मेडी में जोत जगायी,
पीर जी आया पीठ के लारे,
छतर पंका उल्टा घुमे,
अफसर करे लाचारी।।
दादा ने मानो रे भाई,
भगता ने मानोंरे भाई,
कर विश्वास दादा ने मानों,
मन इच्छा फल पाई।।
गायक – भँवर जी फतेहपुर।
प्रेषक – लकी जेडीए।
9672117818








