बरसाने में बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी,
बरसाओ ऐसी करुणा,
बरसाओ ऐसी करुणा,
जब तक है जिंदगानी।।
तर्ज – तुझे भूलना तो चाहा।
मैं थक गई किशोरी,
दुनिया की होते होते,
कोई हुआ ना अपना,
कहूँ सच ये रोते रोते,
अपना लो श्यामा प्यारी,
अपना लो श्यामा प्यारी,
मैं हूँ शरण तिहारी,
बरसाने मे बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी।।
मेरी आत्मा से पूछो,
तुम्हे कितना चाहता हूँ,
हर चाहना के पीछे,
बस तुमको चाहता हूँ,
बस कर दो एक इशारा,
बस कर दो एक इशारा
तेरी है मेहरबानी,
बरसाने मे बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी।।
ले जाओ अब तो श्यामा,
मेरी बाँह को पकड़ के,
घबरा रही किशोरी,
कर्मो से अपने डर के,
शर्मिंदा हूँ मैं प्यारी,
शर्मिंदा हूँ मैं प्यारी,
कैसे कहुं जुबां से,
बरसाने मे बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी।।
कितने धनी है श्यामा,
जिन्हें आप ने संभाला,
करुणा की कोर करके,
भवसिंधु से निकाला,
मेरे सर पे हाथ रख दो,
मेरे सर पे हाथ रख दो,
मैं दासी हूँ तुम्हारी,
बरसाने मे बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी।।
बरसाने में बसा लो,
मुझको हे श्यामा प्यारी,
बरसाओ ऐसी करुणा,
बरसाओ ऐसी करुणा,
जब तक है जिंदगानी।।
स्वर – मुकुल द्विवेदी।
लेखक – बाबा धसका पागल पानीपत।








