बचपन भी हार गया,
मेरे घर के गुजारे में,
फिर जीत मिली मुझको,
हारे के सहारे में।।
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
ना खेल खिलौने थे,
मेरे घर के आंगन में,
कागज की नाव बना,
झूमे हम सावन में,
नैया वो भी डूबी,
आकर के किनारे में,
फिर जीत मिली मुझको,
हारे के सहारे में।।
त्योहारों में बाबा,
घर मेरा सुना था,
घर मेरा चमक जाए,
इतना भी न चूना था,
हर रंग भी बेरंग था,
मेरे घर के द्वारे में,
फिर जीत मिली मुझको,
हारे के सहारे में।।
रोज़ी रोटी मेरी,
तुमने ही चलाई है,
कल सुखी भी ना थी,
संग आज मलाई है,
‘विक्की’ को सांस मिले,
तेरे जयकारे में,
फिर जीत मिली मुझको,
हारे के सहारे में।।
बचपन भी हार गया,
मेरे घर के गुजारे में,
फिर जीत मिली मुझको,
हारे के सहारे में।।
Singer / Lyrics – Vikas Agarwal
‘Vicky Kanpur Wale’
6394332715








