श्याम बाबा श्याम बाबा,
घणा होशियार लागे से,
फागण की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
खाटू वालो श्याम धणी को,
भोत बड़ो दरबार,
फागन मेलो खर्चिलो है,
खर्चो बेसुमार,
काई बोलूं मैं-2,
समझदार लागे से,
फागन की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
ठाट बाट स ना जावा तो,
हो जावे हल्काई,
फागन म नहीं नोट उड़ावा,
हो जावे लोग हसाई,
तेरे भक्ता की-2,
भरमार लागे से,
फागन की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
श्याम धणी म्हारो समझ इशारों,
मत ना मुंह खुलवाओ,
नहीं बुलाना हो तो कह दे,
म्हासू क्यों नटवावे,
बिना पीसा के-2,
सब बेकार लागेसे,
फागन की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
या मत सोच सेठ सावरा,
खोखा चार ज्यादा,
इतना से मेरो काम चले ना,
मैं हूँ सीधा साधा,
मिलण ताई दिल-2,
बेकरार लागे से,
फागन की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
हर ग्यारस बारस को खर्चा,
सारा एमे आ गया,
शरम चढ़े ‘बनवारी’ थासू,
फेर दुबारा मांग्या,
केवल तू ही श्याम-2,
रिश्तेदार लागे से,
फागन की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
श्याम बाबा श्याम बाबा,
घणा होशियार लागे से,
फागण की त्यारी में,
खोखा चार लागे से।।
गायक – विकास झा।
79806 72853
लेखक – जय शंकर चौधरी जी।








