थारे झाँझ नगाड़ा बाजे रे,
खाटू वालो श्याम धनी,
भगता संग नाचे रे।bd।
तर्ज – ढोला ढोल मजीरा बाजे रे।
पीत वसन पीतांबर धारी,
गल बैजन्ती माला,
काना माही कुंडल चमके,
नैन लगे मतवाला,
बाबो लीले चढ़कर आवे रे,
खाटू वालों श्याम धणी,
भगता संग नाचे रे।bd।
फागुन सुदी ग्यारस को मेलो,
भीड़ लगे है भारी,
भक्ता के संग होली खेले,
बाबो बारी बारी,
बाबो भक्ता से बतलावे रे,
खाटू वालों श्याम धणी,
भगता संग नाचे रे।bd।
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे,
मन इच्छा फल पावे,
भीड़ पड़े भक्ता के ऊपर,
लीले चढ़कर आवे,
बाबो मोरछड़ी घुमावे रे,
खाटू वालों श्याम धणी,
भगता संग नाचे रे।bd।
‘बाबूलाल’ खाटू को वासी,
चरणा शीश नवावे,
थारो आसरो छोड़ के बाबा,
और कठे ना जावे,
‘श्रुति’ नाच नाच के रिझावे रे
खाटू वालों श्याम धणी,
भगता संग नाचे रे।bd।
थारे झाँझ नगाड़ा बाजे रे,
खाटू वालो श्याम धनी,
भगता संग नाचे रे।bd।
Singer – Shruti Sharma Khatu Wali








