थारो जी म्हारो काई करो भाईडा रेे थारो मारो अटी रे जाय

थारो जी म्हारो,
काई करो भाईडा रेे,
थारो मारो अटी रे जाय।।



मुटिया ज्यो बांध कर,

आयों मारा भाया रे,
हाथ पसारिया जाय,
सपना को संसार आतो,
कादा वाली गार आतो,
फूला वाली बास आतों,
कांटा वाली जाड आतों,
उलझ पुलज मर जाय,
भाईडा रेे थारो मारो,
अटी रे जाय।।



ई धरती का उपरे भाईडा रेे,

लाखो आया लाखों रे जाएं,
आँचा आँचा काम करो,
मन भाईडा रे,
मनका देई पाची नाई आय,
बाता माई काई वेलो,
पकड़ो थे सुक्रत को गेलों,
यो जीवन पाणी को रेलों,
या जीवा को दो दिन मेलों,
अन्त अकेलो जाए,
भाईडा रेे थारो मारो,
अटी रे जाय।।



ओ उगीयो जो दिन पांचों,

आते मारा भाइडा रे,
जीव छूड़ियां ड्स जाय,
पान खरिया पाछा नाई,
लागे मारा भाईया रेे,
जन्में जोई मर जाय,
पलाली को पुश योतो,
ओष वालों मोती योतो,
काच केरी चूड़ी यातो,
पाणी को ब्रबडो योतो,
फटक फटक फुट जाय,
भाईडा रेे थारो मारो,
अटी रे जाय।।



सब सु हिल मिल चालो,

मारा भाया रे,
जीवनों खानाडा वाली धार,
एक दीन छोड़नो,
पडसी रे प्रखड़ो रे,
आबा वालों बीजली रो तार,
समंदा वाली लेर यातो,
माटी केरी काया यातों,
बादल वाली छाया यातों,
हरति फिरती माया यातो,
पल पल रंग बताय,
भाईडा रेे थारो मारो,
अटी रे जाय।।



जर ज़मीन जोरू जेवर,

सब जूटा मारा भाया रे,
कदियान आपना होए,
जीने थे समजिया आपन,
पछिड़ा रे आपन प्राया होए,
जूटी ज़ग की रीत यांतो,
मुंडे देकी प्रति यातो,
गारा कि भीत येतो,
स्वार्थ कितो प्रीत यातो,
भैरव मती भरमाय,
पंछीडा रेे थारो मारो,
अटी रे जाय।।



थारो जी म्हारो,

काई करो भाईडा रेे,
थारो मारो अटी रे जाय।।

गायक – राहुल सुथार।
प्रेषक – कालू लाल लोधा।
09460303612


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