सुरा लड़ता जावे,
दोहा – धर्म थारो जे हिंदू है,
जे राखे ढाल तलवार,
धर्म धजा धेनु रा दुश्मन रो,
दिजे शीश उतार।
(हिंदू हो तो हिंदू बनना सीखो,
कंधों से ऊंची छाती नहीं होती,
धर्म से बड़ी कोई जाति नही होती।)
मायड़ थारा अंबर में,
केसरियो ध्वज लहरावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
हिन्दवाणी पथ राखण राणो,
रण में लड़तो जावे,
मतवाला वो चेतक रण में,
हाथी पे चढ जावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
कांप उठिया बेरी रण में जद,
राणो खड़ग चलावे,
अण गिण पोवे भाला सु,
मुगला तो मरता जावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
क्रोध भरी आख़िया राणा री,
शाही सेना भागे,
एक एक मेवाड़ी रण में,
दश दश मुगला मारे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
आन मेवाड़ी रक्त बहावे,
घायल वेता जावे,
आभूषण ज्यु सुरवीरा रे,
अंग पे घाव लागे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
संता री या भारत भूमि,
विश्व गुरु कहलावे,
मातृभूमि और गुरु चरणों में,
वारी वारी जावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
हिंदवाणे रो जाग्यो हिंदू,
जग में सिंह कहावे,
जाग उठो क्षत्रिय रा जाया,
केशु लिखतो जावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लडता जावे।।
मायड़ थारा अंबर में,
केसरियो ध्वज लहरावे,
धर्म ध्वजा धेनु रक्षा में,
सुरा लड़ता जावे।।
गायक – अनंत लोहार।
लेखक / प्रेषक – केशु लाल लोहार।
9784293640








