श्याम म्हारे मन की पीड़ा,
थानै ही सुणाऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
तर्ज – सौ साल पहले।
जन्मयो हूँ जद सैं श्याम,
ठोकरां खातो आयो हूँ,
मैं ढूंढ्यो भोत घणो,
दयालु ना थांसो पायो हूँ,
आयो हूँ रोतो दर पे,
बाहर हंसतो जाऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
या नानी बाई श्याम,
थानै तो बीर बणायो थो,
द्रौपद की राखी लाज,
श्याम थे चीर बढ़ायो थो,
वैसी ही दया की दृष्टि,
श्याम थांसै चाहूँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
या दुनिया पूछैगी,
बोल के काम तेरो होग्यो,
तूं फिरै हांडतो सदा,
पहनकर श्याम को चोगो,
पूछैगा लोग मन्नै,
फिर के बताऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
गफलत में मत राखो,
बोल दयो सीधी-सादी बात,
फैसलों थानै करणो है,
बाबा आज इबकी स्यात,
न्याय करणिया थे हो,
न्याय कराऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
हे मीरां के घनश्याम,
म्हारी पत राख्यां सरसी रे,
मैं आन पड्यो दर पे,
बोल इब क्यांमे बड़सी रे,
थे ही बतादयो मन्नै,
छोड़ कठे जाऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
‘आनन्दी’ आई दर पे,
श्याम थारै भगतां नै साथ लिया,
यो ‘पवन’ खड्यो दर पे,
श्याम थारी मोटी आस लियां,
जीऊँ हूँ आस लियां,
दीदार पाऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
श्याम म्हारे मन की पीड़ा,
थानै ही सुणाऊँगा,
दे द्यूंगा ज्यान पर मैं,
दर सैं ना जाऊँगा।।
Singer – Mahesh Parmar
Upload By – Kanak
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