भोला भगत म्हे थारा,
तू ही तो निभावेगो,
मिंच ले आँख्यां पण तू,
भुला कोणी पावेगो।।
तर्ज – सौ साल पहले।
थारे और म्हारे में,
नहीं है फासलो कोई,
सायों है तू म्हारो,
म्हारो तो हौसलो तू ही,
दिल में तू क़ैद म्हारे,
निकल कोणी पावेगो,
मिंच ले आँख्यां पण तू,
भुला कोणी पावेगो।।
झोली ना भरैगो तो,
मैं आँखड़ली ना बहाऊंगा,
इतनो ना गयो गुजरीयो,
बदल जो दर से जाऊंगा,
नकटो हूँ आदत थारी,
कइयां छोड़ावेगो,
मिंच ले आँख्यां पण तू,
भुला कोणी पावेगो।।
ताली दे दे हांसे,
अठे सब म्हारे ऊपर श्याम,
इब हांसे तो हांसे,
अठे कुण आसी म्हारे काम,
कालजे ‘कपिल’ ने बाबा,
तु ही तो लगावेगो,
मिंच ले आँख्यां पण तू,
भुला कोणी पावेगो।।
भोला भगत म्हे थारा,
तू ही तो निभावेगो,
मिंच ले आँख्यां पण तू,
भुला कोणी पावेगो।।
गायक – संजय मित्तल जी।
लेखक – कपिल जी।








