उमड़ घुमड़ छाई जो घटाएं,
सबको यही बताएं की,
सावन आ गया है,
कि सावन आ गया हैं,
वो चित चोर कन्हैया देखो,
मन की डोर हिलाए,
कि सावन आ गया हैं,
कि सावन आ गया हैं।।
तर्ज – मिलों ना तुम तो।
आओ पधारो कान्हा,
झूला लगाया मैंने बाग में,
झूला झुलाऊं मैं तो,
बंसी बजाना ऐसी राग में,
रिमझिम बरसेगी जो फुहारी,
सबके मन को चुराए,
कि सावन आ गया हैं,
कि सावन आ गया हैं।bd।
आई मिलन की बेला,
भानु लली और ब्रजराज की,
मिलकर उतारो नजरें,
तीनों लोकों के सरताज की,
लता पता ऐसी हरसाएं,
नजर कहीं लग जाए,
कि सावन आ गया हैं,
कि सावन आ गया हैं।bd।
करना तो वादा ऐसा,
जाने से पहले मेरे हाथ में,
आओगे जब भी लेना,
संग में ‘तरुण’ को अपने साथ में,
मन में कसक यही बस बाकी,
गोदी में तू झुलाए,
कि सावन आ गया है।bd।
उमड़ घुमड़ छाई जो घटाएं,
सबको यही बताएं की,
सावन आ गया है,
कि सावन आ गया हैं,
वो चित चोर कन्हैया देखो,
मन की डोर हिलाए,
कि सावन आ गया हैं,
कि सावन आ गया हैं।।
Singer – Priya Prachi Thakur
Lyrics – Rishabh Jain ”Tarun”








