प्रथम पेज राजस्थानी भजन सत गुरु मिलिया भागी भरमना पाप नहीं पनोती

सत गुरु मिलिया भागी भरमना पाप नहीं पनोती

सत गुरु मिलिया भागी भरमना,
पाप नहीं पनोती,
पुरबले री प्रीतो पालो,
बहुत करें असतुती।।



दिल दरिया मे डुबकी लेणा,

मोती लेणा गोती,
डावी इगला जिमणी पिगला,
अध बिस गंगा उलटी,
मन केरो साबुन पवन केरो,
पाणी धोऐले भरम री धोती।।



इण काया मे नौव दरवाजा,

दसवें आडी खिडकी,
ओ खिडकी कोई संत खोले,
कुशी ले उण घर की।।



रणु कार पर झणु कार हैं,

झणु कार पर जोती,
जोती उपर अभे सुण है,
अभे सुण पर मोती।।



खारे सागर मे शिप निपजे,

सवा लाख रो मोती,
भावपुरी सरणे डुगरपुरी,
बोले हरि रो हार पुरोती।।



सत गुरु मिलिया भागी भरमना,

पाप नहीं पनोती,
पुरबले री प्रीतो पालो,
बहुत करें असतुती।।

प्रेषक – मांगीलाल राजपुरोहित
8875733390


https://youtu.be/9Gxd5gRcOGg

कोई टिप्पणी नही

आपको ये भजन कैसा लगा? कृपया प्ले स्टोर से भजन डायरी एप्प इनस्टॉल कीजिये।

अपनी टिप्पणी लिखें
अपना नाम दर्ज करें

error: कृपया प्ले स्टोर से \"भजन डायरी\" एप्प डाउनलोड करे।