राम रस बरसे रे,
राम रस बरसें,
तू भी आजा राम शरण में,
आजा आजा हरि भजन में,
मनवा क्यों तरसे,
राम रस बरसें रे,
राम रस बरसें।।
बूंद बूंद में दया राम की,
बरसे अंबर से,
बरसे अंबर से,
मन की प्यास बुझे जन्मों की,
अंग अंग हरषे,
अंग अंग हरषे,
प्रेम-नीर में भीग बावरे,
भीतर बाहर से,
राम रस बरसें रे,
राम रस बरसें।।
जिसने भी इस रस को पाया,
खो गया इस रस में,
खो गया इस रस में,
हो जाए वो प्रभु राम का,
राम उसी के बस में,
राम उसी के बस में,
देखले आके हरि भजन में,
प्रेम सुधा बरसे,
राम रस बरसें रे,
राम रस बरसें।।
काम क्रोध मद लोभ मोह का,
चक्र हटा मन से,
चक्र हटा मन से,
विरथा डोले क्यों बन बन में,
पूछे दर दर से,
पूछे दर दर से,
मन मंदिर में राम बसे है,
क्यों ना चरण परसे,
राम रस बरसें रे,
राम रस बरसें।।
राम रस बरसे रे,
राम रस बरसें,
तू भी आजा राम शरण में,
आजा आजा हरि भजन में,
मनवा क्यों तरसे,
राम रस बरसें रे,
राम रस बरसें।।
Singer – Pandit Sudhir Vyas Ji








