प्रथम पेज राजस्थानी भजन प्यारी लागे ओ साँवरिया थाकि मुकट मणि भजन लिरिक्स

प्यारी लागे ओ साँवरिया थाकि मुकट मणि भजन लिरिक्स

प्यारी लागे ओ साँवरिया,
थाकि मुकट मणि।

दोहा – प्रीत लगाकर सांवरा,
तू परदेसा मति जाय,
में ल्याउ मांग कर,
तू बेठो बेठो खाय।



प्यारी लागे ओ साँवरिया,

थाकि मुकट मणि,
ओ मुकट मणि ओ थाके,
सोवे तो घणी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।



भाई रुक्मइयो मारो,

ब्याह जी रचावे देखो जी,
भाई रुक्मइयो मारो,
ओ थाणे तो गई थी मारे,
मांडा की टणी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।



यो शिशुपाळो चंदेरी को राजा,

देखो जी यो शिशुपाळो,
अरे फोज्या ल्यायो जी यो तो,
गणी तो गणी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।



आप न आवो सांवरा,

प्राण तजी देउ जी,
आप न आवो,
आप का बीना तो मारो,
कोन है धणी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।



ओ पदम बणे ओ काई,

ए पाय लागू थाके जी,
पदम पड़े ओ कई,
नाव तो भवंर के या,
बीच मे पड़ी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।



प्यारी लागे ओ सांवरिया,

थाकि मुकट मणि,
ओ मुकट मणि ओ थाके,
सोवे तो घणी,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।

गायक – रामप्रसाद जी।
प्रेषक – कुलदीप मेनारिया
9799294907


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