मेरे मोहन तुम्हे अपनों को तड़पाने की आदत है लिरिक्स
मेरे मोहन तुम्हे अपनों को, तड़पाने की आदत है, मगर अपनों को भी है, जुल्म सह जाने की आदत है, ...
Read moreDetailsमेरे मोहन तुम्हे अपनों को, तड़पाने की आदत है, मगर अपनों को भी है, जुल्म सह जाने की आदत है, ...
Read moreDetailsतेरी मोरछड़ी से सांवरे, दुःख दूर हो गए, तेरे इस झाड़े से बाबा, सब काम हो गए, तेरे इस झाड़े ...
Read moreDetailsसिया रघुवर जी की आरती, शुभ आरती कीजे।। शीश मुकुट काने कुण्डल सोहे , राम लखन सिया जानकी, शुभ आरती ...
Read moreDetailsअरे भाईडा चालो चालो, आई माता रे धाम, भाईडा चालो चालो, बिलाड़ा रे धाम, दर्शन देवेला आई माँ, द्वार पे ...
Read moreDetailsभूल्या ने राय समझ तुम देवो, ह्रदय करो उजियारो, आनंद मेरे गणपति देव पधारो, आनंद मेरे गणपति देव पधारों।। गणपति ...
Read moreDetailsहे गणपति जगा दो, किस्मत क्यों सोती, द्वारे पे तेरे आके, बेटी तुम्हारी रोती, तुम ज्ञान की हो मूरत, प्यारी ...
Read moreDetailsमुरली वाले से रिश्ता बना ले, अपने जीवन की बगिया सजा ले, अपने जीवन की बगिया सजा ले।। आस पूरी ...
Read moreDetailsदेना हो तो दे दे सांवरे, क्यों ज्यादा तरसावे से, ना देना तो साफ नाट, क्यों लखदातार कहावे से।। काट ...
Read moreDetailsकैकेई के वचन कठोर, भरत के सुनतहि अंसुआ भर आए, जननी के वचन कठोर, भरत के सुनतहि अंसुआ भर आए।। ...
Read moreDetailsमन रे काई करबा ने आयो, वृथा जन्म लियो धरती पर, जन्म लेर पछतायो।। मिनख जमारो दियो रामजी, प्रारब्ध से ...
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