अमृत को छोड़ कर जहर काहे पीजे भजन लिरिक्स
अमृत को छोड़ कर, जहर काहे पीजे, राम नाम लीजे, और सदा मौज कीजे।। मीठा राम नाम है, और मीठी ...
Read moreDetailsअमृत को छोड़ कर, जहर काहे पीजे, राम नाम लीजे, और सदा मौज कीजे।। मीठा राम नाम है, और मीठी ...
Read moreDetailsआरती पवन दुलारे की, भक्त भय तारणहारे की।। तर्ज - आरती कुञ्ज बिहारी की। दोऊ कर चरण शीश नाऊँ, दास ...
Read moreDetailsइबके फागुन श्याम के दर पे, जाना ही जाना, दर्शन खाटू वाले श्याम धनी का, पाना ही पाना, दर पे ...
Read moreDetailsलाखो दानी देखे, ना कोई ऐसा महादानी, संत शिरोमणि ऋषि दधीचि, की सुनलो रे अमर कहानी, जय जय ऋषि राज, ...
Read moreDetailsहे करुणाकर हे जग त्राता, हे जगदीश्वर विश्वविधाता, हे कृपाला मंगल दाता, हे सर्वेश्वर भाग्य विधाता।। तेरे चरण है मान ...
Read moreDetailsमैं श्याम नाम जपूँ जग जानता, श्याम बिना दिल नहीं लगता, कभी चाँद तो कभी सूरज सा, सांवरे का मुखड़ा ...
Read moreDetailsबिन पानी के नाव खे रही है, माँ नसीब से ज्यादा दे रही है।। तर्ज - श्याम चूड़ी बेचने आया। ...
Read moreDetailsभरी उनकी आँखों में, है कितनी करुणा, जाकर सुदामा भिखारी से पूछो, है करामात क्या, उनके चरणों की रज में, ...
Read moreDetailsबांस की बांसुरिया लाला, कहाँ ते लायो रे, कन्हैया बांसुरी बजा दे, अब तो फागुन आयो रे।। मोर मुकुट माथे ...
Read moreDetailsवो दिन दिल दुखाए, बहुत दिल दुखाए, कहके गए थे लौट, आओगे परसो, परसो की कहके, बरसो ना आए, वो ...
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