नाचबा में काई की शरम आवे,
दोहा – शिव समान दाता नहीं,
विपत्ति विदारण हार,
लज्जा मोरी राखियो,
शिव नंदी रे असवार।
नाचबा में काई की शरम आवे,
भोला बाबा भी नाचे।।
ब्रह्मा भी नाचे देखो विष्णु भी नाचे,
डमरू बजाता भोलानाथ नाचे,
भोला बाबा भी नाचे।।
राधा भी नाचे देखो रुक्मण भी नाचे,
बंशी बजाता घनश्याम नाचे,
भोला बाबा भी नाचे।।
राम जी भी नाचे देखो लक्ष्मण भी नाचे,
चुटकी बजाता हनुमान नाचे,
भोला बाबा भी नाचे।।
नाचवा में काई की शरम आवे,
भोला बाबा भी नाचे।।
गायक – विजय गौतम अकलेरा।
देखें – धोली छतरिया में बैठया री भोलानाथ।








