ज्याने ओहम सोहम में जोई रे,
म्हारो मन माला में पोई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
सुख रा महल सोवना छाजा,
टारी भरम देहड़ली रो राजा,
ज्या री अविगत से गति होई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
तालो लागो तालुआ रे ओळे,
सतगुरु बिना कैसे खोले,
ज्या री कूंची जगत कर जोई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
पांच चोर जुगती से पकड़ो,
तीन गुण निश्चय कर हेरो,
ज्या री अविगत से गति जोई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
शीतलनाथ संतोषी स्वामी,
अंतर दास केवो गणनोमी,
ज्या ने दास कबीरसा जोई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
ज्याने ओहम सोहम में जोई रे,
म्हारो मन माला में पोई रे,
म्हारों मन रे माला में पोई रे।।
स्वर – जोग भारती जी।
प्रेषक – रविंद्र गोस्वामी।
8733994254








