म्हारी सुरता सुहागन नार कुवारी क्यों फिरे भजन लिरिक्स

म्हारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



मारा सतगुरु विलपर लाभ,

लगन लिखावीये,
मारा सतगुरु विलपर लाभ,
लगन लिखावीये,
अरे अमरापुर रे माय,
लगनीया मेलना ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



पाँच पच्चीस रो साथ,

वोनेला वापरे,
पाँच पच्चीस रो साथ,
वोनेला वापरे,
अरे लागे वोनेलो रो मोह,
लाडली नखरा करे ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



सत रो सेवरो पेर घणो,

फेरे ग्यान रो,
सत रो सेवरो पेर घणो,
फेरे ग्यान रो,
अरे ममता री मेहन्दी,
आड पीठी हरी नाम री ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



सोहन शिखर रे माय,

चवरिया मांडसी,
सोहन शिखर रे माय,
चवरिया मांडसी,
अरे हरी सु हथलेवो जोड,
लाडली फेरा फिरे ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



मंगला गाया चार,

विवाह भरतावीयो,
मंगला गाया चार,
विवाह भरतावीयो,
अरे ब्रह्म वाचे वेद,
गुरु चेली परनीया ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



लागो पियुजी रो प्रेम,

पिहर नही आवडे,
लागो पियुजी रो प्रेम,
पिहर नही आवडे,
अरे ध्यान घोडे असवार,
घरे हालो आपने ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



सोहन शिखर रे माय,

विवाह कोई संत करे,
सोहन शिखर रे माय,
विवाह कोई संत करे,
बोल्या संत कबीर,
सूरा नर यु चढे ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।



म्हारी सुरता सुहागन नार,

कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
घणी समझनी नार,
कुवारी क्यु फिरे,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।

गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
9640557818


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