हे पांच गज रा कपडा मंगाया हा,
हे सुरता तराग डोरी भरी,
तीन गुण रा हुआ प्रकाशा,
हे जोली मोडी हैं खरा खरी,
मैं अलखिया पिर पिछम रा,
सत री जोली बाबा तीर करी रे हा।।
हा आउ हसला साउ सिपीया,
हे वसन भभुती में रया खरी,
चार जुगो सु फरु भटकतो,
अबके मिलिया परम हरी,
मैं अलखया पिर पिछम रा,
सत री जोली बाबा तीर करी रे हा।।
पांच बगला पचिस मेडियो,
नव दरवाजा जोया खरी,
दसवे दवारे अलख जगायो,
चारो सेहरीया में खबरों पडी,
मैं अलखया पिर पिछम रा,
सत री जोली बाबा तीर करी रे हा।।
एक अलखये शब्द सुनायो,
ओ सुन में शब्द लगन करी,
दयानाथ री विणती,
ने आवु सोरासी खरी,
मैं अलखया पिर पिछम रा,
सत री जोली बाबा तीर करी रे हा।।
हे पांच गज रा कपडा मंगाया हा,
हे सुरता तराग डोरी भरी,
तीन गुण रा हुआ प्रकाशा,
हे जोली मोडी हैं खरा खरी,
मैं अलखिया पिर पिछम रा,
सत री जोली बाबा तीर करी रे हा।।
गायक – सुरेश लोहार।
प्रेषक – छगनाराम चौधरी।
8696575053








