खामोश क्यों हो बाबा,
हारा है लाल तेरा,
डर डर के जी रहा हूं,
हर ओर है अंधेरा।।
तर्ज – मौसम है आशिकाना।
दरबार में कन्हैया,
कितनो को है उबारा,
फिर क्यो मैं भटकता,
हूं जग में बेसहारा,
नजरें करो दयालु,
नजरे करो दयालु,
बालक हूं मैं तुम्हारा,
बालक हूं मैं तुम्हारा,
खामोश क्यूँ हो बाबा,
हारा है लाल तेरा,
हारा है लाल तेरा।।
जख्मो से मैं भरा हूं,
अपनो से मैं लड़ा हूं,
घायल कलेजा लेकर,
चौखट पर मैं खड़ा हूं,
पढ़लो ना ओ कन्हैया,
पढ़लो ना ओ कन्हैया,
आंखों में दर्द मेरा,
आंखों में दर्द मेरा,
खामोश क्यूँ हो बाबा,
हारा है लाल तेरा,
हारा है लाल तेरा।।
क्यूं देर कर रहा है,
मुझको संभालने में,
ये जमाना लग रहा है,
इज्जत उछालने में,
बाहो में भर कपिल को,
बाहो में भर कपिल को,
कर दो नया सवेरा,
कर दो नया सवेरा,
खामोश क्यूँ हो बाबा,
हारा है लाल तेरा,
हारा है लाल तेरा।।
खामोश क्यों हो बाबा,
हारा है लाल तेरा,
डर डर के जी रहा हूं,
हर ओर है अंधेरा।।
गायक – सौरभ शर्मा।
प्रेषक – साहिल सांखला।








