मैं तो गाता रहूंगा,
तेरे गीत रसिया।
दोहा – मेरी इस जीवन नैया का,
खिवैया कोई और है,
मैं हूं काठ की पुतली,
पर नचैया कोई और है,
मैं गीत मोहन के गाऊं,
या व्यथा अपनी सुनाऊं,
ये कंठ तो है मेरा,
पर गवैया कोई और है।
मैं तो गाता रहूंगा,
तेरे गीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
तेरी राहों में जीवन,
गुजारूंगा मैं,
अपना दिल अपनी जान,
तुम पे वारूंगा मैं,
मेरे मन के तुम ही हो,
मनमीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
तुम ना आए तो,
फिर भी पुकारूंगा मैं,
बंद आंखों से,
तुमको निहारूंगा मैं,
मैं भी देखूंगा,
कौन गया जीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
तुझे पाने में लग जाए,
कितने जन्म, हर जन्म में ही तुमको,
पुकारेंगे हम,
है अनोखी ये प्रीत,
की रीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
ऐसी ‘चित्र विचित्र’ की,
हो जिंदगी,
बनके पागल करेंगे,
तेरी बंदगी,
तू ही सरगम है,
तू ही संगीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
मैं तो गाता रहूँगा,
तेरे गीत रसिया,
कई जन्मों से,
तेरी मेरी प्रीत रसिया।bd।
स्वर – बाबा श्री चित्र विचित्र बिहारी दास जी महाराज।








