झूला झूल रहे गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में,
नंद बाबा के आंगन में,
माँ यशोदा के आंगन में
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
रेशम की डोरी बांधी,
फूलन से डोल सजाई,
है जल झूलनी का त्योहार,
नंद बाबा के आंगन में,
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
या के मोर मुकुट सिर सोहे,
पीतांबर मन को मोहे,
या की लेवे नजर उतार,
नंद बाबा के आंगन में,
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
देखन को सखियां आई,
गावे मंगल गीत बधाई,
झूमे सारा ही ब्रजधाम,
नंद बाबा के आंगन में,
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
माँ यशोदा लेत बलैया,
झूले सावल श्याम कन्हैया,
गूंजे लाल की जय जयकार,
नंद बाबा के आंगन में,
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
झूला झूल रहे गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में,
नंद बाबा के आंगन में,
माँ यशोदा के आंगन में
झुला झुल रहें गोपाल,
नंद बाबा के आंगन में।।
🎤 गायक / Singer – Smrati Mourya
✍️ लेखक / Lyrics – Shekhar Mourya








