आज अवध सजा दो फूलों से,
मेरे राम जी आने वाले है,
मेरे राघव आने वाले है।।
कोई ढोल नगाड़े बजाओ रे,
कोई मंगल गाने गाओ रे,
कोई ढोल नगाड़े बजाओ रे,
कोई मंगल गाने गाओ रे,
सब मिलके जय जयकार करो,
मेरे राम जी आने वाले हैं।।
चौदह वर्ष बिताए है वन में,
कितने कष्ट उठाए है वन में,
चौदह वर्ष बिताए है वन में,
कितने कष्ट उठाए है वन में,
प्रभु लौट के घर को आए है,
खुशियों के दिन फिर आए है।।
भाई भरत ने राह निहारी है,
आखों में आस तुम्हारी है,
भाई भरत ने राह निहारी है,
आखों में आस तुम्हारी है,
है खड़ाऊ लेकर द्वार खड़े,
मेरे रघुवर आने वाले है।।
अब घर घर दीप जलाओ रे,
सब मंगल थाल सजाओ रे,
अब घर घर दीप जलाओ रे,
सब मंगल थाल सजाओ रे,
अंधियारा दूर भगाओ सब,
मेरे रघुवर आने वाले है।।
सीता संग लखन को लाए है,
वनवास बिता कर आए है,
सीता संग लखन को लाए है,
वनवास बिता कर आए है,
देखो रथ पे विराजे रामलला,
मेरे भाग जगाने वाले है।।
आज अवध सजा दो फूलों से,
मेरे राम जी आने वाले है,
मेरे राघव आने वाले है।।
Singer / Lyrics – Shekhar Mourya








