हे त्रिपुरारी गंगाधरी सृष्टि के आधार भजन लिरिक्स

हे त्रिपुरारी गंगाधरी सृष्टि के आधार भजन लिरिक्स

हे त्रिपुरारी गंगाधरी,
सृष्टि के आधार,
शंकर किरपा करुणाकार,
भोले किरपा करुणाकार।।

तर्ज – हे दुःख भंजन।



शिव शंकर है नाम तिहारा,

चंद्रशेखर शिव अगहारा,
दानी महादानी शिव शंकर,
दानी महादानी शिव शंकर,
करते बेड़ा पार,
शंकर किरपा करुणाकार,
भोले किरपा करुणाकार।।



गौरा जी के प्राण प्यारे,

कार्तिक गणपत आँख के तारे,
त्रिपुंड धारी है नटराजा,
पहने सर्प हार,
शंकर किरपा करुणाकार,
भोले किरपा करुणाकार।।



नीलकंठ जय भीमाशंकर,

महाकाल जय जय अभ्यंकर,
मृगछाला और भस्मी धारी,
जय जय डमरू धार,
शंकर किरपा करुणाकार,
भोले किरपा करुणाकार।।



हे त्रिपुरारी गंगाधरी,

सृष्टि के आधार,
शंकर किरपा करुणाकार,
भोले किरपा करुणाकार।।

स्वर – राकेश काला जी।


आपको ये भजन कैसा लगा ? अपने विचार बताएं

अपनी टिप्पणी लिखें
अपना नाम दर्ज करें