हर महीने बनभौरी में तू,
क्या करने जाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता,
जब याद सताए मैया की,
फिर कुछ भी ना भाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता।।
तर्ज – मैं बाबा ले आया।
माँ है ममता का सागर,
हर बिगड़ी बात बनाती,
भले मैं भूल जाऊँ,
बच्चों को माँ ना भुलाती,
इस जीवन की पतवार को,
मैं चरणों में सौंप आता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता।।
सदियों से नाता अपना,
वो है कुलदेवी हमारी,
जिसने है वंश बढ़ाया,
वो मैया शेर सवारी,
संकट आने से पहले,
माँ का पहरा हो जाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता।।
दुनिया ने कसर ना छोड़ी,
भरोसा हर पल तोड़ा,
मेरी बनभौरी माँ ने,
कभी मेरा हाथ ना छोड़ा,
प्रिंस शुभम को मैया बस,
तेरा ही दर भाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता।।
हर महीने बनभौरी में तू,
क्या करने जाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता,
जब याद सताए मैया की,
फिर कुछ भी ना भाता,
मैं माँ से मिल आता,
मैं झोलिया भर लाता।।
गायक – प्रिंस शुभम नरेला।
संपर्क – 7840820050 / 8750104889
लेखक – प्रिंस जैन।








